बहुत तंग करते हों शत्रु तो अपनाएं ये पांच आसान टोटके, वे हो जायेंगे शान्त

जिन्दगी की राह में जाने-अनजाने शत्रुओं का आगमन हो ही जाता है. इनका प्रमुख कर्तव्य होता है कि बिना किसी कारण के भी हमें कष्ट पहुँचाना.
इसीलिए तो श्रीरामचरितमानस में तुलसीदासजी ने बड़े ही लगन से इनकी वन्दना की है:–

“बन्दों संत असज्जन चरना, दुखप्रद उभय बीच कछु बरना. बिछुरत एक प्राण हरि लेहीं, मिलत एक दारुण दुःख देहीं.”

अर्थात, सज्जन लोगों का जब साथ छूटता है तो बहुत कष्ट होता है, किन्तु दुष्ट तो मिले नहीं कि कष्ट देना शुरू कर देंगें. और शत्रु तो प्रमाणित दुष्ट होते ही हैं, अत वे तो जिन्दगी में आये नहीं कि पीड़ा देना प्रारम्भ कर देंगें. इसलिए उनसे बचने का उपाय करना आवश्यक होता है.

उपरोक्त तथ्य को ध्यान में रख नीचे पांच सरल टोटके दिए जा रहे हैं, जिन्हें अपनाकर व्यक्ति अपने दुखदायक दुश्मनों के बाणों से अपने को बचा सकते हैं:-

1. एक मुठ्ठी काला तिल लेकर उसमें शक्कर मिला दें. इसके बाद किसी को बिना बताये उसे चुपचाप किसी निर्जन स्थान पर डाल दें और मन-ही मन भगवान् को प्रार्थना करें कि वे आपके शत्रुओं को शान्त कर दें. फिर चुपचाप ही अपने घर को लौट जाएँ .

2. उडद का 38 दानों को आप्ने शुत्रु का नाम लेकर चुपचाप किसी निर्जन स्थान पर दबा दें.शत्रु नष्ट हो जायेगें.

3 सुबहसबेरे उठें और स्नानकर भगवान् भोलेनाथ को साक्षी रखकर श्री गणेश की पूजा करें और उसके बाद श्रीसीताराम का ध्यान करें “श्री बजरंग बाण” को सातबार पढ़ें. फिर पांच अखंडित लौंग को लें और देशी कर्पुर के साथ उसे जला दे. जब यह ठंडा हो जाय तो उसके भस्म को पूरी श्रद्धा के साथ अपने ललाट में लगाकर बाहर जाएँ. शत्रु शिथिल पर जाएंगे.

4. सुबह स्नानादि करके श्री गणेशजी की पूजाकर लहसुनियाँ से निर्मित शिवलिंग की जल, फूल, बिल्बपत्र, धूप, दीप आदि से पूजा करें. शत्रु लोग आपसे दूर भागेंगे.

5. सुबह पूजा के समय श्री दुर्गासप्तशती के कवच का नित्य पाठ शत्रुओं से अवश्य ही रक्षा करता है .कल्याण हो. सुरक्षित रहें.

संकलन एवं संपादन: ज्योतिष विशेषज्ञ श्री सिद्धिनाथ.
(ज्योतिषीजी जी बिहार प्रसाशनिक सेवा से सेवा निवृत होने के बाद मानव कल्याण के लिए ज्योतिष परामर्श देते हैं. केवल अत्यंत जरुरी कार्य अथवा परेशानी के लिए संपर्क करें.)
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