परीक्षा, इंटरव्यू, गृहप्रवेश, विवाह आदि कार्यों को निर्विघ्न पूरा करने के लिए, सबसे पहले लें श्री गणेशजी के ये बारह नाम

यह तो सभी लोग जानते हैं कि किसी भी पूजा , जप , यज्ञ , आदि शुभ कार्यो को आरम्भ करने से पहले श्री गणेशजी का पूजन कर ही लिया जाना चाहिए , जिससे कि वह कार्य बिना रुकावट या संकट के प्रशन्नता पूर्वक सम्पन्न हो जाय |

शास्त्रों का यह सर्वसम्मत मत है |

इसके अलावे श्रीगणेश पुराण में यह आया है कि अन्य महत्वपूर्ण कार्यों – परीक्षा देने , इंटरव्यू देने , घर से बहार निकलने , पढ़ाई या नौकरी शुरू करने जैसे किसी भी काम का आरम्भ श्री गणेशजी के इन बारह नामों को पढ़ , बोल या सुन लेने से ये काम भी बिना किसी परेशानी के पूर्ण हो जाते हैं:-

मूल संस्कृत में यह महामंत्र और इसकी महत्ता इस प्रकार है :-

सुमुख: च एकदन्त: च कपिलो गजकर्णक:
लम्बोदर: च विकतो विघ्ननाशक विनायक:||
धूम्रकेतु: गणाध्यक्षो:
भालचन्द्रो गजानना: ||

द्वादश एतानि नामानि
य: पठेत् श्रुणुयात अपि ||

विद्या आरम्भे विवाहे च
प्रवेशे निर्गमे तथा ||

संग्रामे संकटे चैव
विघ्न: तस्य न जायते ||

शुक्ल अम्बर धरं देवं
शशि नं वर्णम चतुर्भुजं ||

प्रशन्न वदनं ध्यायेत
सर्व विघ्नोपि शान्तये ||

अभिसिप्त अर्थ सिद्धि अर्थं
पूजितोय: सूरा असुरै: ||

सर्व विघ्न हर: तस्मै
गणा अधिपतिये नम : ||

इसका हिंदी में नाम और अर्थ इसप्रकार है :-

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नाम का अर्थ इस प्रकार है:
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१. सुमुख
१ सुन्दर मुखवाले , जिनको देखने या उसकी कल्पना करने से ही
ही मन प्रशन्न हो जाता है |

२ एकदन्त
२. एक दांतवाले |

३. कपिल
३. जिनकी मूर्ति या शरीर से नीले और पीले रंग का प्रकाश फैलता रहता है |

४. गजकर्ण
४. हाथी के कान वाले |

५, लम्बोदर
५. जिनका पेट लम्बा है |

६. विकट
६. सभी से श्रेष्ठ अर्थात सर्वश्रेष्ठ |

७. विघ्ननाशक
७. संकटों का विनाश करने वाले |

८. विनायक
८ अच्छे और शुभ कार्यों को करने की प्रेरणा देनेवाले

९. धूम्रकेतु
९, धुएं के रंग का पताका वाले , अर्थात , जैसे आग से धुआँ उपर की जाकर फ़ैल जाता है, वैसे ही अच्छे कर्मों को करने वालों की कीर्ति को जगत में फैलाने वाले |

१० गणाध्यक्षो
१०. सभी प्रकार के गणों से स्वामी |

११. भालचंद्र
११. माथे पर शुक्लपक्ष के चन्द्रमा को धारण करने वाले |

१२. गजानन
१२. हाथी के मुख वाले |

विद्यारम्, विवाह , कहीं प्रवेश, निकलने ( यात्रा ) करने , संग्राम ( लड़ाई, झंझट आदि ) , संकट ( कार्यों में बाधा, रुकावट , व्यापार में घाटे, बिमारी आदि ) में उसे कोई विघ्न नहीं अता है और, यदि विघ्न उपस्थित हो भी जाता है तो प्रशन्न और चंद्रमा के सामान मुखवाले उज्जवल वस्त्र पहनने वाले चतुर्भुज श्रीगणेशजी का ध्यान करने से वह शांत ,अर्थात समाप्त ,हो जाता है |

अत: , मनोरथ को पूर्ण करने के लिए सभी विघ्नों को दूर करने वाले और देवताओं तथा दानवों से पूजित होने वाले इस परम देव की आराधना अवश्य ही करनी चाहिए |

सब के कल्याणार्थ संकलन एवं सम्पादन – सिद्धि नाथ झा

(ज्योतिषीजी जी बिहार प्रसाशनिक सेवा से सेवा निवृत होने के बाद मानव कल्याण के लिए ज्योतिष परामर्श देते हैं. केवल अत्यंत जरुरी कार्य अथवा परेशानी के लिए संपर्क करें.)
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